सदियों पुरानी परंपरा का उत्सव: ऐतिहासिक झंडा मेला शुरू,आस्था का महासागर उमड़ा

सदियों पुरानी परंपरा का उत्सव: ऐतिहासिक झंडा मेला शुरू,आस्था का महासागर उमड़ा

देहरादून। राजधानी में आस्था और परंपरा का प्रतीक ऐतिहासिक झंडा मेला आज से शुरू हो गया। यह मेला श्री गुरु राम राय दरबार साहिब परिसर में श्री झंडे जी के पवित्र ध्वजदंड के आरोहण के साथ विधिवत प्रारंभ हुआ, जिसमें हजारों कि संख्या में श्रद्धालु और संगत शामिल हुए।यह ऐतिहासिक मेला हर वर्ष होली के पांचवें दिन आयोजित किया जाता है और संत गुरु राम राय जी की जयंती से जुड़ी आस्था का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान हजारों श्रद्धालु उत्तराखंड ही नहीं बल्कि पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और अन्य राज्यों से भी देहरादून पहुंचते हैं। करीब 350 वर्षों से अधिक पुरानी परंपरा वाला यह झंडा मेला देहरादून की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

जानकारी के मुताबिक सिखों के सातवें गुरु हर राय के बड़े बेटे श्री गुरु राम राय महाराज का जन्म सन 1646 ईस्वी में पंजाब के जिला होशियारपुर स्थित किरतपुर में हुआ. उसके बाद उन्होंने देहरादून को अपनी तपस्थली बनाया. यहां दरबार साहिब में लोक कल्याण के संदेश के साथ एक विशाल ध्वजदंड स्थापित कर श्रद्धालुओं को ध्वज के माध्यम से आशीर्वाद प्राप्त करने की प्रेरणा दी। परंपरा के अनुसार हर साल होली के पांचवें दिन चतुर्वेदी पंचमी को श्री गुरु राम राय महाराज के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। इसी अवसर पर ऐतिहासिक झंडे जी मेला आयोजित किया जाता है।

दून में आस्था और प्रेम,सद्भाव का प्रतीक पुराने झंडे जी को उतारने के बाद पूजा और गिलाफ चढ़ाने की दिनभर चलने वाली प्रक्रिया के बाद दरबार साहिब महंत देवेंद्र दास महाराज की अगुवाई में झंडा मेला श्री गुरु राम राय दरबार साहिब में 94 फीट ऊंचे झंडे जी का आज आरोहण हुआ. झंडे जी के आरोहण के दौरान बाहरी राज्यों से आए लाखों की संख्या में संगतें और श्रद्धालु इस शुभदिन के गवाह बने। इस बार देहरादून के व्यापारी अनिल कुमार गोयल के परिवार को दर्शनी गिलाफ चढ़ाने का सौभाग्य मिला ।

इस बार यह मेला 27 मार्च रामनवमी तक मेला चलेगा। इस बार 8 फरवरी 2026 से उत्तराखंड के अलावा पंजाब,हरियाणा ओर उत्तर प्रदेश सहित विदेशों से संगत के पहुंचने का सिलसिला जारी है.दरबार साहिब में आने वाले संगठनों और श्रद्धालुओं की मन्नतें पूरी होती हैं. साल भर देश-विदेश से श्रद्धालु इस पावन अवसर की प्रतीक्षा करते हैं. इस साल भी बड़ी संख्या में संगतें और श्रद्धालु देहरादून पहुंच चुके हैं.10 मार्च को दरबार साहिब से सुबह 7:30 बजे नगर परिक्रमा शुरू होगी. 27 मार्च को रामनवमी के मौके पर मेले का समापन होगा.

आज 8 मार्च रविवार को सुबह 7 बजे विशेष पूजा के बाद झंडा जी को उतारने की प्रक्रिया की गई. दूध,दही और गंगाजल से नए झंडे जी का स्नान कराया गया. उसके बाद सुबह 10 बजे से सादे गिलाफ चढ़ाने का कार्यक्रम हुआ. दोपहर 1:00 बजे सुनील के गिलाफ चढ़ाए गए. इस दौरान दरबार साहिब के सज्जादाशीन श्री महंत देवेंद्र दास महाराज ने संगत को आशीर्वाद दिया. उसके बाद महेंद्र देवेंद्र दास महाराज झंडे जी का आरोहण कराया. शाम को संत गुरु महाराज का आशीर्वाद लेकर विदा हो गए.

राजधानी देहरादून में आस्था और परंपरा के अनुसार श्रीमहंत देवेंद्र दास महाराज की अगुवाई में धार्मिक विधि-विधान के साथ पवित्र ध्वज को उतारकर स्नान कराया गया और नए गिलाफ चढ़ाने के बाद ध्वजदंड का आरोहण किया गया। इस अवसर पर देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने दरबार साहिब में मत्था टेककर आशीर्वाद प्राप्त किया।

साथ ही पूरा वातावरण गुरु महाराज व झंडेजी के जयकारों से गूंज उठा। संगतें ढोल की थाप पर नृत्य करने लगीं। कई श्रद्धालुओं की आंखें भी नम हो गईं।रविवार दोपहर चार बजकर 12 मिनट पर सज्जादानशीन श्रीमहंत देवेन्द्र दास महाराज के दिशा-निर्देशन में 94 फीट ऊंचे झंडेजी का आरोहण हुआ।उत्तराखंड के अलावा दिल्ली, चंडीगढ़, पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा आदि राज्यों व विदेश से पहुंचे हजारों श्रद्धालु इस अविस्मरणीय क्षण के साक्षी बने।मंगलवार को दरबार साहिब के सज्जादानशीन श्रीमहंत देवेन्द्र दास महाराज की अगुआई में नगर परिक्रमा निकाली जाएगी।

इसके लिए श्री दरबार साहिब, श्रीझंडा जी मेला आयोजन समिति ने तैयारी पूरी कर ली है। वहीं, विभिन्न राज्यों से आई कुछ संगतें झंडेजी का आरोहण संपन्न होने के बाद शाम को ही दरबार साहिब में माथा टेक अपने शहरों के लिए रवाना होंगी।मेला आयोजन समिति के अनुसार झंडा मेला इस बार कई दिनों तक चलेगा, जिसमें धार्मिक अनुष्ठान, नगर परिक्रमा, भंडारा और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। प्रशासन की ओर से सुरक्षा और व्यवस्थाओं के विशेष इंतजाम किए गए हैं।