- आखिर किसके संरक्षण में हैं आरोपी? जांच रिपोर्ट और चार्जशीट के बावजूद कार्रवाई का इंतजार
- पीएम पोषण योजना में कथित अनियमितता: कार्रवाई में देरी से ‘आरोपी को बचाने’ की आशंका गहराई
- जांच में मिली अनियमितताओं की पुष्टि, फिर भी नहीं हुई सजा; कैंट बोर्ड की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
देहरादून। प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण (पीएम पोषण) योजना के तहत ‘मिड डे मील’ में कथित अनियमितताओं के मामले में कैंट जूनियर हाई स्कूल, प्रेमनगर की तत्कालीन प्रधानाध्यापिका श्रीमती ममता गुलेरिया के विरुद्ध जांच में गंभीर तथ्य सामने आने और चार्जशीट जारी होने के बावजूद अब तक कोई अंतिम कार्रवाई न होने से कैंटोनमेंट बोर्ड की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले को लेकर यह चर्चा तेज हो गई है कि कहीं संबंधित अधिकारियों द्वारा आरोपी को बचाने का प्रयास तो नहीं किया जा रहा।
प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार श्रीमती ममता गुलेरिया के विरुद्ध मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत के बाद जिला शिक्षा अधिकारी के निर्देश पर मामले की जांच राजकीय इंटर कॉलेज, गाजीवाला, देहरादून के प्रधानाचार्य से कराई गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर जिला शिक्षा अधिकारी ने 4 नवम्बर 2024 को कैंट बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) को पत्र भेजकर कैंटोनमेंट बोर्ड कर्मचारी सेवा नियमावली-2021 के अंतर्गत कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।
इसके बाद कैंट बोर्ड द्वारा गठित तीन सदस्यीय प्रारंभिक जांच समिति ने भी अपनी रिपोर्ट में पीएम पोषण योजना के तहत चावल और दालों के वितरण तथा अभिलेखों के रखरखाव में अनियमितताओं की पुष्टि की। जांच रिपोर्ट के आधार पर बोर्ड ने 27 मार्च 2025 की बैठक में श्रीमती ममता गुलेरिया को चार्जशीट जारी करने का प्रस्ताव पारित किया और 4 अप्रैल 2025 को उन्हें औपचारिक रूप से चार्जशीट भी जारी कर दी गई।
हैरानी की बात यह है कि शिकायत दर्ज होने और जांच शुरू होने के दो वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी मामले में अंतिम निर्णय या अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं हो सकी है। इस बीच जिला परियोजना कार्यालय, पीएम पोषण, देहरादून ने 23 जून 2025 को कैंट बोर्ड को कड़ा पत्र भेजते हुए स्पष्ट कहा कि पीएम पोषण भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण फ्लैगशिप योजना है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता क्षमा योग्य नहीं है।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि लगभग तीन माह बीत जाने के बाद भी मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई, जो “अत्यंत खेदजनक और दुर्भाग्यपूर्ण” है। जिला शिक्षा अधिकारी ने कैंट बोर्ड से तत्काल जांच रिपोर्ट और कार्रवाई की आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए ताकि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पोर्टल सहित अन्य पोर्टलों पर मामले की अद्यतन स्थिति दर्ज की जा सके।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जांच रिपोर्ट में अनियमितताओं की पुष्टि हो चुकी है, चार्जशीट जारी हो चुकी है और जिला शिक्षा विभाग लगातार कार्रवाई का दबाव बना रहा है, तो फिर अंतिम कार्रवाई में इतनी देरी क्यों हो रही है? प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि कहीं कुछ अधिकारी मामले को लंबा खींचकर आरोपी को राहत पहुंचाने की कोशिश तो नहीं कर रहे।
जनता और अभिभावकों की निगाहें अब कैंटोनमेंट बोर्ड प्रशासन पर टिकी हैं। देखना होगा कि करोड़ों रुपये की सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही का दावा करने वाला तंत्र इस मामले में कब तक निर्णायक कदम उठाता है।
Related
Mamta Guleriya,Mid-Day Meal,PM Poshan Scheme






