- आरोपियों को जांच समिति में शामिल करना न्याय के साथ खिलवाड़
- विधानसभा की संयुक्त समिति से कराई जाए इस प्रकरण की जांच
देहरादून। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने बद्रीनाथ धाम में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान में कथित चोरी के मामले को अत्यंत गंभीर बताते हुए राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों पर दान में अनियमितता और चोरी के आरोप लग रहे हैं, उन्हीं से जुड़े अधिकारियों वकर्मचारियों को जांच समिति का हिस्सा बनाना न्याय और पारदर्शिता के सिद्धांतों के विपरीत है। यह स्थिति बिल्कुल वैसी है जैसे बिल्ली को ही दूध की रखवाली सौंप दी जाए।
गोदियाल ने कहा कि इस प्रकार गठित जांच समिति से निष्पक्ष और विश्वसनीय जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रकरण की जांच विधानसभा की संयुक्त समिति (जॉइंट कमेटी) से कराई जाए, जिसकी अध्यक्षता नेता प्रतिपक्ष करें, ताकि आम जनता और करोड़ों श्रद्धालुओं का विश्वास कायम हो सके। यदि राज्य सरकार को इस पर कोई आपत्ति है, तो जांच प्रक्रिया की निगरानी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश से कराई जाए।
करोड़ों सनातन धर्म मानने वाले लोगों की आस्था के साथ जिस प्रकार राम मंदिर में खिलवाड़ हुआ, उसी तरह अब श्री बद्रीनाथ धाम का मामला भी सामने आया है।
सत्ता प्रतिष्ठान से नियुक्त लोगों पर मंदिरों में चोरी, हीरे-जवाहरात और चढ़ावे में गड़बड़ी के गंभीर आरोप सामने आए हैं।
मैं इस पूरे… pic.twitter.com/mSWOPkUSAC— Ganesh Godiyal (@UKGaneshGodiyal) July 6, 2026
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के पास इस मामले में निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई करने का अवसर था, लेकिन जिस प्रकार पूर्व में केदारनाथ स्वर्ण प्रकरण में प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, उसी तरह इस मामले में भी सरकार की मंशा संदिग्ध दिखाई दे रही है।
उन्होंने कहा कि जब बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष के निजी सहायकों पर ही आरोप लग रहे हों और उसी तंत्र से जुड़े लोगों को जांच समिति में शामिल किया जाए, तो ऐसी जांच की विश्वसनीयता स्वतः समाप्त हो जाती है। कांग्रेस पार्टी ऐसी समिति की रिपोर्ट को स्वीकार नहीं करेगी और पारदर्शी, स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की अपनी मांग पर दृढ़ता से कायम रहेगी।
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