नए लुक में उत्तराखंड लौट रहे हरदा

नए लुक में उत्तराखंड लौट रहे हरदा

देहरादून। लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के कारण दिल्ली में रहकर स्वास्थ्य लाभ ले रहे उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत अब प्रदेश लौट रहे हैं। रावत का दो दिवसीय कार्यक्रम सामने आया है।

इसके मुताबिक वह 20 सितंबर 2026 को दिल्ली से सड़क मार्ग से उत्तराखंड पहुंचेंगे और उनकी प्रदेश वापसी की शुरुआत रामपुर तिराहा स्थित उत्तराखंड आंदोलन के शहीद स्मारक से होगी। रावत की वापसी ऐसे दौर में हो रही है, जब पिछले कुछ समय से उनकी तबीयत, सक्रिय राजनीति से संन्यास की अटकलों और हाल ही में कांग्रेस के संगठनात्मक पदों से हटने के उनके निर्णय को लेकर लगातार चर्चा होती रही है।

रावत के जारी कार्यक्रम के अनुसार वह 20 सितंबर को सुबह करीब नौ बजे दिल्ली से कार द्वारा रवाना होंगे। करीब 11:30 बजे रामपुर तिराहा पहुंचकर उत्तराखंड आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इसके बाद उनका काफिला नारसन, मंगलौर और रुड़की होते हुए हरिद्वार पहुंचेगा। हरिद्वार में मां गंगा की पूजा-अर्चना और दुग्धाभिषेक का कार्यक्रम निर्धारित है। इसके बाद वह डोईवाला के लच्छीवाला स्थित मणिमाई मंदिर पहुंचेंगे, जहां पूजा-अर्चना और प्रसाद वितरण का कार्यक्रम है।

शाम को देहरादून पहुंचने के बाद रावत कचहरी स्थित शहीद स्मारक पर उत्तराखंड आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इसके बाद डिफेंस कॉलोनी स्थित आवास पर रात्रि विश्राम का कार्यक्रम है।

रावत का कार्यक्रम अगले दिन भी जारी रहेगा। 21 सितंबर को वह देहरादून के विभिन्न सिद्ध मंदिरों में पूजा-अर्चना करेंगे। कार्यक्रम में कालू सिद्ध, लक्ष्मण सिद्ध, मांडू सिद्ध और माणक सिद्ध मंदिरों में दर्शन-पूजन शामिल है।

इस दो दिवसीय कार्यक्रम में एक तरफ उत्तराखंड आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि है तो दूसरी ओर धार्मिक स्थलों पर पूजा-अर्चना। ऐसे में रावत की प्रदेश वापसी को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और उनके समर्थकों में उत्सुकता बनी हुई है।

हरीश रावत पिछले कुछ महीनों से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे थे। जून में तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें देहरादून के दून अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उस समय उन्हें सांस लेने में तकलीफ होने की जानकारी सामने आई थी।

इसके बाद अगस्त में रावत दिल्ली में स्वास्थ्य लाभ ले रहे थे। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने स्वास्थ्य को लेकर भावुक संदेश भी साझा किया था और कहा था कि स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद वह जल्द उत्तराखंड लौटेंगे। अगस्त के अंत में कांग्रेस नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली में उनके आवास पर मुलाकात कर स्वास्थ्य का हाल जाना था।
अब 20 सितंबर के कार्यक्रम के साथ उनकी प्रदेश में सार्वजनिक मौजूदगी फिर दिखाई देने जा रही है।

रावत की वापसी से पहले उनके राजनीतिक संन्यास को लेकर भी काफी चर्चा रही। सितंबर के पहले सप्ताह में सक्रिय राजनीति से उनके संन्यास की खबरें और अटकलें सामने आई थीं। इसके बाद रावत ने सार्वजनिक बयान में इन चर्चाओं पर प्रतिक्रिया दी थी।

4 सितंबर को उन्होंने कहा था कि कुछ लोग उन्हें सक्रिय राजनीति से संन्यास दिलाने की कोशिश कर रहे हैं। उनके बयान के बाद यह स्पष्ट हुआ कि उन्होंने स्वयं सक्रिय राजनीति से संन्यास की घोषणा नहीं की थी। इसलिए रावत की मौजूदा स्थिति को लेकर यह अंतर महत्वपूर्ण है कि संन्यास की चर्चाएं अलग विषय थीं, जबकि बाद में उन्होंने कांग्रेस के कुछ संगठनात्मक पदों से हटने का निर्णय लिया।

हरीश रावत से जुड़ा दूसरा बड़ा घटनाक्रम सितंबर में सामने आया। उनके पूर्व ओएसडी और सहयोगी चंदन सिंह जीना के परिसरों पर प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई के बाद रावत ने कांग्रेस के संगठनात्मक पदों से हटने की घोषणा की।

रिपोर्टों के मुताबिक ईडी की कार्रवाई कथित भर्ती अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के सिलसिले में हुई थी। एजेंसी की कार्रवाई में नकदी, सोना और महंगी घड़ियां बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई। यह जांच 2016 की उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से जुड़ी भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के मामले से संबंधित बताई गई है।

रावत ने 11 सितंबर को सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि वह नहीं चाहते कि उनके साथ जुड़े किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई का असर कांग्रेस के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान पर पड़े। इसी संदर्भ में उन्होंने उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी के सदस्य और कांग्रेस कार्यसमिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य के पद से हटने की इच्छा जताई।

इस्तीफे की खबरों के बीच एक महत्वपूर्ण बात यह रही कि रावत ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता छोड़ने की बात नहीं कही। उन्होंने बाद में स्पष्ट किया कि उनका निर्णय संगठनात्मक पदों से संबंधित था और कांग्रेस से उनका संबंध बना हुआ है। 18 सितंबर को उनके इस्तीफे की पेशकश से संबंधित पत्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल को मिलने की खबर भी सामने आई।

इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक हलकों में यह सवाल भी उठा कि क्या रावत संगठनात्मक जिम्मेदारियों से अलग होकर भी कांग्रेस के लिए सक्रिय भूमिका निभाएंगे। उनके आगामी कार्यक्रम से फिलहाल इतना स्पष्ट है कि वह प्रदेश में सार्वजनिक गतिविधियों के लिए लौट रहे हैं।