विद्युत की आपूर्ति के लिए यूपीसीएल कर रहा निरंतर प्रयास : ध्यानी

विद्युत की आपूर्ति के लिए यूपीसीएल कर रहा निरंतर प्रयास : ध्यानी

देहरादून। जलविद्युत उत्पादन में भारी गिरावट और पीक आवर्स में बढ़ती बिजली मांग के बावजूद उत्तराखण्ड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) ने राज्य में विद्युत रोस्टरिंग (बिजली कटौती) को न्यूनतम स्तर पर बनाए रखने के लिए व्यापक रणनीतिक प्रयास शुरू किए हैं। यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक पीसी ध्यानी ने आयोजित पत्रकार वार्ता में वर्तमान विद्युत संकट के वास्तविक कारणों, आपातकालीन रोस्टरिंग की स्थिति और विद्युत आपूर्ति को सामान्य बनाए रखने के लिए निगम द्वारा किए जा रहे निरंतर प्रयासों की विस्तृत जानकारी दी।

प्रबंध निदेशक ने बताया कि वर्तमान में राज्य में विद्युत की कमी का प्रमुख कारण राज्य की जलविद्युत परियोजनाओं से अपेक्षाकृत कम उत्पादन, केंद्रीय जलविद्युत परियोजनाओं से कम विद्युत प्राप्ति तथा पीक आवर्स के दौरान विद्युत मांग में वृद्धि है। सितम्बर माह में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में उत्तराखण्ड जलविद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) से प्राप्त जलविद्युत उत्पादन में लगभग 170 मेगावाट की कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2025 के सितम्बर पीक आवर्स में यूजेवीएनएल का औसत उत्पादन लगभग 1,094 MW था, जो इस वर्ष घटकर लगभग 912 MW रह गया है।

केंद्रीय जलविद्युत स्टेशनों से भी पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 90 MW कम विद्युत प्राप्त हो रही है। टिहरी पम्प स्टोरेज प्लांट की दो इकाइयां तकनीकी कारणों से उपलब्ध नहीं होने के कारण पीक आवर्स में लगभग 100 MW विद्युत उपलब्धता प्रभावित हो रही है। इन सभी परिस्थितियों के सम्मिलित प्रभाव से वर्तमान में पीक आवर्स के दौरान राज्य में औसतन लगभग 350 MW की विद्युत कमी उत्पन्न हो रही है, जिसके कारण आवश्यकता के अनुसार सीमित एवं नियंत्रित रोस्टरिंग करनी पड़ रही है।

प्रबंध निदेशक ने बताया कि वर्तमान परिस्थिति में केवल स्थानीय उत्पादन की कमी ही चुनौती नहीं है, बल्कि पीक आवर्स के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर भी विद्युत उपलब्धता सीमित है। ऊर्जा एक्सचेंज में दिन के सौर ऊर्जा उपलब्धता वाले घंटों में बिजली अपेक्षाकृत सस्ती एवं पर्याप्त उपलब्ध रहती है, जबकि शाम एवं रात्रि के पीक आवर्स में उपलब्धता कम होने के कारण विद्युत की कीमत काफी अधिक (लगभग 10 रुपये प्रति यूनिट तक) हो जाती है।

ऐसी स्थिति में UPCL द्वारा विद्युत एक्सचेंज के माध्यम से निरंतर बिजली खरीदने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि राज्य में विद्युत कटौती को न्यूनतम रखा जा सके।
प्रबंध निदेशक ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में उत्तराखण्ड में विद्युत रोस्टरिंग को न्यूनतम रखने के लिए यूपीसीएल द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। वर्तमान आपातकालीन परिस्थितियों में रोस्टरिंग को भी प्राथमिकता के वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक आधार पर निर्धारित किया जा रहा है।

कुमाऊं एवं गढ़वाल क्षेत्र के फर्नेस/स्टील फर्नेस को प्राथमिकता के आधार पर रोस्टरिंग में शामिल किया जा रहा है। इसके पश्चात ग्रामीण कुमाऊं एवं गढ़वाल क्षेत्रों में आवश्यकता के अनुसार रोस्टरिंग की जा रही है। प्रबंध निदेशक ने स्पष्ट किया कि रोस्टरिंग का उद्देश्य विद्युत आपूर्ति को बाधित करना नहीं, बल्कि उपलब्ध सीमित विद्युत संसाधनों का अधिकतम एवं संतुलित उपयोग करते हुए राज्य के अधिकतम उपभोक्ताओं को विद्युत उपलब्ध कराना है।

रखरखाव कार्यों का समायोजन: फील्ड इकाइयों को निर्देशित किया गया है कि निर्धारित रखरखाव के कार्यों को संभव हो तो रोस्टरिंग अवधि के दौरान किया जाए अथवा आवश्यकता होने पर स्थगित किया जाए, ताकि सामान्य आपूर्ति अवधि में अनावश्यक व्यवधान न हो। पीक आवर्स के दौरान हाइड्रो जनरेटरों को अधिकतम संभव सीमा तक शेड्यूल करने तथा सौर ऊर्जा उपलब्धता के घंटों में तकनीकी रूप से संभव सीमा तक जलविद्युत उत्पादन को कम रखने की रणनीति भी अपनाई जा रही है, जिससे उपलब्ध जल संसाधनों का पीक डिमांड के समय अधिक प्रभावी उपयोग किया जा सके।

प्रबंध निदेशक ने सभी फील्ड अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि रोस्टरिंग की अवधि के दौरान उपभोक्ताओं की शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर त्वरित निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। प्रबंध निदेशक ने मीडिया प्रतिनिधियों से भी अपील की कि वर्तमान विद्युत स्थिति की वास्तविक परिस्थितियों एवं उपलब्ध संसाधनों की सीमाओं को आमजन तक सही एवं तथ्यात्मक रूप में पहुंचाने में सहयोग करें, ताकि प्रदेश में विद्युत संकट के संबंध में किसी प्रकार का भ्रम उत्पन्न न हो।

पत्रकार वार्ता में निदेशक (वितरण एवं परियोजना), कार्यकारी निदेशक (तकनीकी) सहित यूपीसीएल के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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