मदरसा बोर्ड खत्म करने की जल्दबाजी में प्राधिकरण का ढांचा बनाना भूली सरकार

मदरसा बोर्ड खत्म करने की जल्दबाजी में प्राधिकरण का ढांचा बनाना भूली सरकार

  • कर्मचारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट
  • तीन माह से वेतन को तरसे कर्मचारी
  • नौकरी बचेगी या नहीं इसे लेकर भी असमंजस

देहरादून। प्रदेश में मदरसा बोर्ड खत्म कर आधुनिक शिक्षा व्यवस्था लागू करने का दावा तो कर दिया गया, लेकिन नई व्यवस्था को जमीन पर उतारने के लिए जरूरी ढांचा अब तक तैयार नहीं हो पाया है। उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन हुए तीन माह हो चुके हैं, मगर इसका ढांचा अभी शासन और वित्त विभाग की फाइलों के बीच है। इधर, पुराने मदरसा बोर्ड में काम करने वाले नौ कर्मचारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। तीन माह से वेतन नहीं मिला और अब यह भी तय नहीं कि ढांचा स्वीकृत होने के बाद उनकी नौकरी बचेगी या नहीं।

सरकार ने एक जुलाई 2026 से उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम और नई मान्यता नियमावली लागू करते हुए मदरसा शिक्षा परिषद को समाप्त कर दिया था। इसके स्थान पर उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया गया। सरकार की ओर से इसे आधुनिक शिक्षा व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया।

लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद भी प्राधिकरण का अपना स्टाफ और ढांचा तय नहीं हो सका। ऐसे में पुराने मदरसा बोर्ड में तैनात कर्मचारी ही कामकाज संभालते रहे। दूसरी ओर, 10 जुलाई को कैबिनेट ने मदरसा शिक्षा परिषद से संबंधित बजट मद को समाप्त करने का निर्णय ले लिया। इसका सीधा असर कर्मचारियों के वेतन पर पड़ा।

सीएम-मंत्री से लगा चुके वेतन-समायोजन की गुहार

बोर्ड में नौ कर्मचारियों में पांच कनिष्ठ सहायक, एक उर्दू अनुवादक, दो अनुसेवक और एक स्वीपर-कम-चौकीदार शामिल हैं। इनमें छह कर्मचारी उपनल और तीन पीआरडी के माध्यम से कार्यरत हैं। इन कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, मंत्री खजान दास, विशेष सचिव अल्पसंख्यक कल्याण डॉ. पराग मधुकर धकाते, निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण और प्राधिकरण के अध्यक्ष सुरजीत सिंह गांधी को पत्र भेजकर अपनी समस्या बताई है। बावजूद इसके तीन माह गुजर गए, लेकिन वेतन भुगतान और नौकरी के भविष्य को लेकर तस्वीर साफ नहीं हुई है।

काम वही, मगर वेतन और भविष्य दोनों पर सवाल

कर्मचारियों की स्थिति इसलिए भी असमंजस भरी है क्योंकि जिस व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया, उसके कामकाज से जुड़े कर्मचारी अभी भी नई व्यवस्था में काम कर रहे हैं। सवाल यह है कि जब तक प्राधिकरण का ढांचा स्वीकृत नहीं होता, तब तक इन कर्मचारियों के काम और वेतन की जिम्मेदारी किसकी होगी। और ढांचा स्वीकृत होने के बाद भी दूसरा बड़ा सवाल सामने हैकृक्या पुराने नौ कर्मचारियों को नए प्राधिकरण में समायोजित किया जाएगा या उन्हें नए सिरे से नियुक्ति प्रक्रिया से गुजरना होगा? इसका स्पष्ट जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है।

जल्द होगा ढांचा स्वीकृतः धकाते

उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का ढांचा अभी स्वीकृत नहीं हुआ है। इसका मसौदा वित्त विभाग को भेजा गया है। वहां से प्रस्ताव आने के बाद ढांचा स्वीकृत किया जाएगा… डॉ. पराग मधुकर धकाते विशेष सचिव, अल्पसंख्यक कल्याण

ढांचा स्वीकृति के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। उम्मीद है कि जल्द स्वीकृति मिल जाएगी। इसके बाद प्राधिकरण में स्वीकृत ढांचे के अनुरूप स्टाफ नियुक्त किया जाएगा…. सुरजीत सिंह गांधी अध्यक्ष, उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण

Madarsa board,UMEA,Uttarakhand Minority Education Authority