Home Uttarakhand Dehradun दुष्यंत गौतम की नियुक्ति से उत्तराखण्ड में उबाल

दुष्यंत गौतम की नियुक्ति से उत्तराखण्ड में उबाल

दुष्यंत गौतम की नियुक्ति से उत्तराखण्ड में उबाल

देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की भूमिका उजागर करने की मांग को लेकर उत्तराखंड की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के विरोध में शुक्रवार को कांग्रेस ने देहरादून की सड़कों पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया।

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव व उत्तराखंड प्रभारी कुमारी शैलजा और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में निकाली गई बाइक-स्कूटर रैली के जरिए कांग्रेस ने सरकार और भाजपा पर तीखे सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि अंकिता को न्याय मिलने तक इस मामले में उठ रहे अनुत्तरित सवालों का जवाब दिया जाए और कथित वीआईपी की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

रैली आईएसबीटी के निकट शिमला बाईपास चौक से शुरू हुई। यहां एकत्र कांग्रेस कार्यकर्ता जीएमएस रोड और बल्लूपुर चौक होते हुए घंटाघर पहुंचे। यहां उत्तराखंड राज्य आंदोलन के प्रमुख नेता स्वर्गीय इंद्रमणि बडोनी की प्रतिमा के निकट धरना-प्रदर्शन किया गया। कांग्रेस नेताओं ने दुष्यंत कुमार गौतम की राज्यपाल नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए इसे अंकिता भंडारी प्रकरण में न्याय की मांग कर रहे लोगों की भावनाओं से जुड़ा मुद्दा बताया।

प्रदर्शन में प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा, कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, प्रदेश चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह, प्रदेश चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. हरक सिंह रावत, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा, गुरदीप सिंह सप्पल, प्रदेश सहप्रभारी सुरेंद्र शर्मा, एआईसीसी प्रवक्ता एवं उत्तराखंड मीडिया पर्यवेक्षक पंखुड़ी पाठक, प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष ज्योति रौतेला, प्रदेश प्रवक्ता गरिमा दसौनी, डॉ. प्रतिमा सिंह भी इस मौके पर मौजूद रहीं।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सितंबर 2022 में पौड़ी गढ़वाल के यमकेश्वर क्षेत्र स्थित वनंतरा रिजॉर्ट में कार्यरत अंकिता भंडारी की निर्मम हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस घटना के बाद से ही अंकिता के परिजन, महिला संगठन, युवा और सामाजिक कार्यकर्ता कथित वीआईपी की पहचान तथा उसकी भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग उठाते रहे हैं।

कांग्रेस का आरोप है कि इतने लंबे समय बाद भी कथित वीआईपी को लेकर उठे सवालों का ऐसा संतोषजनक और विश्वसनीय जवाब सामने नहीं आया है, जिससे जनता के मन में व्याप्त संदेह दूर हो सके। कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया कि जब अंकिता के परिजन पूरे प्रकरण का सच सामने लाने की मांग कर रहे हैं, तब दुष्यंत कुमार गौतम को राज्यपाल जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर नियुक्त करने का निर्णय क्या संदेश देता है?

प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने कहा कि राज्यपाल का पद भारतीय संविधान के अंतर्गत अत्यंत सम्मानित और महत्वपूर्ण है। कांग्रेस ने राष्ट्रपति से दुष्यंत कुमार गौतम की राज्यपाल नियुक्ति के निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की।

कांग्रेस ने अंकिता के माता-पिता के संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए उन्हें लगातार आवाज उठानी पड़ रही है। पार्टी ने उनके साथ पुलिस की कार्रवाई और कथित उत्पीड़न को लेकर भी चिंता जताई तथा उनकी सुरक्षा, सम्मान और न्याय सुनिश्चित करने की मांग की।

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