सत्ता अपने करीबियों को बचाने में लगी, युवा खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे
देहरादून। उत्तराखण्ड कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व सीडब्ल्यूसी सदस्य करन माहरा ने कहा कि बेरोज़गार युवाओं के सपनों से खिलवाड़ करने वाले हाकम सिंह को सरकार की ढीली और संदिग्ध पैरवी के चलते क्लीन चिट मिल जाना सिर्फ एक कानूनी फैसला नहीं, बल्कि व्यवस्था पर सवाल है।
माहरा ने कहा कि आज हाकम सिंह खुलेआम जश्न मना रहा है और सत्ता के गलियारों में बैठे लोग संतुष्ट दिखाई दे रहे हैं। अगर सरकार सच में निष्पक्ष होती, तो इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देती। लेकिन ऐसा नहीं होगा क्योंकि यह मामला न्याय से ज़्यादा रिश्तों और संरक्षण का बन चुका है।
माहरा ने कहा कि भाजपा की राजनीति में अपने लोगों को बचाना प्राथमिकता है, चाहे उसके लिए सच और न्याय की बलि ही क्यों न देनी पड़े। अंकिता भंडारी केस में जिस तरह ‘वीआईपी’ को बचाने की कोशिशें हुईं, वह किसी से छुपा नहीं है। अब हाकम सिंह को मिली राहत उसी पैटर्न को दोहराती दिख रही है।
यह सिर्फ एक व्यक्ति को बचाने की बात नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम को ढाल बनाकर सच को दबाने की कोशिश है। उन्होने कहा कि जब तक सत्ता अपने करीबियों को बचाने में लगी रहेगी, तब तक आम जनता, खासकर युवा, खुद को ठगा हुआ महसूस करते रहेंगे। यह सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि व्यवस्था की नीयत का आईना है।






