- श्रमिकों की आवाज़ और जनसंघर्ष के प्रतीक नेता को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई
- देर रात हृदय गति रुकने से हुआ निधन
- मुख्यमंत्री धामी, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत समेत पक्ष-विपक्ष के नेताओं ने दी श्रद्धांजलि
देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति के वरिष्ठतम नेताओं में शामिल, श्रमिकों के अधिकारों के प्रखर पैरोकार और अविभाजित उत्तर प्रदेश तथा उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे हीरा सिंह बिष्ट रविवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। शनिवार देर रात हृदय गति रुकने से 81 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। उनके निधन से उत्तराखंड की राजनीति, श्रमिक संगठनों और सामाजिक क्षेत्र में गहरा शोक व्याप्त है। रविवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम यात्रा में पक्ष और विपक्ष के नेताओं, राज्य आंदोलनकारियों, श्रमिक संगठनों, सामाजिक संस्थाओं तथा हजारों समर्थकों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रीतम सिंह, डॉ. हरक सिंह रावत, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, खजान दास सहित अनेक जनप्रतिनिधि उनके सेवक आश्रम रोड स्थित आवास पहुंचे और पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री धामी ने शोक संतप्त परिवार से मिलकर अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि हीरा सिंह बिष्ट का सार्वजनिक जीवन सदैव जनसेवा, संघर्ष और सादगी का उदाहरण रहेगा।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं इंटक के प्रदेश अध्यक्ष रहे श्री हीरा सिंह बिष्ट जी को कांग्रेसजनों ने उनके आवास पर पुष्पांजलि अर्पित कर तथा कांग्रेस का ध्वज समर्पित कर भावभीनी अंतिम विदाई दी।
गरीबों, मजदूरों, कर्मचारियों और वंचितों की आवाज़ बुलंद करने वाले… pic.twitter.com/MhP4KlXfQG
— Uttarakhand Congress (@INCUttarakhand) July 26, 2026
हीरा सिंह बिष्ट का राजनीतिक जीवन पांच दशकों से अधिक समय तक सक्रिय रहा। वे कांग्रेस के ऐसे नेताओं में रहे जिन्होंने संगठन और जनसरोकारों को हमेशा सर्वाेपरि रखा। श्रमिकों, कर्मचारियों, मलिन बस्तीवासियों और आम जनता के अधिकारों के लिए उन्होंने जीवनभर संघर्ष किया। इसी कारण उन्हें प्रदेश में ष्श्रमिकों का मसीहाष् भी कहा जाता था।
सीने में दर्द के बाद अस्पताल ले जाया गया, नहीं बच सकी जान
परिजनों के अनुसार शनिवार देर रात करीब डेढ़ बजे हीरा सिंह बिष्ट के सीने में अचानक तेज दर्द उठा। उन्हें तत्काल ईस्ट कैनाल रोड स्थित एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन उपचार के दौरान उनका निधन हो गया। बताया जा रहा है कि वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे।
छात्र राजनीति से शुरू हुआ सफर, तीन बार बने विधायक
हीरा सिंह बिष्ट ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत सत्तर के दशक में डीएवी पीजी कॉलेज, देहरादून के छात्रसंघ अध्यक्ष के रूप में की। छात्र राजनीति से निकलकर वे युवा कांग्रेस से जुड़े और शीघ्र ही प्रदेश के प्रभावशाली नेताओं में शामिल हो गए।
वर्ष 1985 में वे पहली बार अविभाजित उत्तर प्रदेश की देहरादून विधानसभा सीट से विधायक निर्वाचित हुए। इसके बाद 2002 में राजपुर विधानसभा तथा 2014 में डोईवाला विधानसभा उपचुनाव जीतकर कुल तीन बार विधायक बनने का गौरव प्राप्त किया।
कैबिनेट मंत्री रहते संभाले कई महत्वपूर्ण विभाग
उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में उन्होंने परिवहन, श्रम, तकनीकी शिक्षा सहित कई महत्वपूर्ण विभागों का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया। प्रशासनिक दक्षता, सरल व्यवहार और जनहित के निर्णयों के कारण वे राजनीतिक विरोधियों के बीच भी सम्मानित रहे।
श्रमिकों और कर्मचारियों की लड़ाई लड़ने वाले नेता
हीरा सिंह बिष्ट लंबे समय तक इंटक के प्रदेश अध्यक्ष रहे। उन्होंने संगठित और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के अधिकारों, न्यूनतम वेतन, श्रमिक सुरक्षा और कर्मचारी हितों के लिए अनेक आंदोलन चलाए। श्रमिक वर्ग के बीच उनकी मजबूत पकड़ थी और वे हर संघर्ष में अग्रिम पंक्ति में दिखाई देते थे।
उत्तराखंड राज्य आंदोलन में निभाई अहम भूमिका
पृथक उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान हीरा सिंह बिष्ट अग्रणी नेताओं में रहे। उन्होंने गांव-गांव जाकर अलग राज्य की आवश्यकता को जन-जन तक पहुंचाया। उनका मानना था कि पर्वतीय क्षेत्रों का समग्र विकास तभी संभव होगा जब उत्तराखंड को अलग राज्य का दर्जा मिले। राज्य आंदोलन के दौरान उन्होंने कई जनसभाओं, धरनों और आंदोलनों का नेतृत्व किया तथा राज्य निर्माण की लड़ाई को मजबूत किया।
सादगी, संघर्ष और जनसेवा उनकी पहचान रही
हीरा सिंह बिष्ट का व्यक्तित्व बेहद सरल और सहज था। राजनीतिक जीवन में उन्होंने कभी भी आम जनता से दूरी नहीं बनाई। उनके आवास के दरवाजे हमेशा आम लोगों के लिए खुले रहते थे। श्रमिक, कर्मचारी, गरीब और मलिन बस्तियों के लोग अपनी समस्याएं लेकर सीधे उनके पास पहुंचते थे और वे हरसंभव सहायता का प्रयास करते थे। यही कारण था कि उन्हें एक जमीनी और जनप्रिय नेता के रूप में जाना जाता था।
पक्ष-विपक्ष ने कहा, उत्तराखंड ने एक बड़ा जननेता खो दिया
हीरा सिंह बिष्ट के निधन पर सभी राजनीतिक दलों के नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हीरा सिंह बिष्ट ने सार्वजनिक जीवन में जनसेवा और विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। उनका निधन उत्तराखंड के लिए अपूरणीय क्षति है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि हीरा सिंह बिष्ट का पूरा जीवन संघर्ष, संगठन और जनसेवा को समर्पित रहा। उनके जाने से कांग्रेस ने अपना एक मजबूत स्तंभ खो दिया। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि हीरा सिंह बिष्ट जैसे नेताओं की राजनीति मूल्यों, संघर्ष और जनता के प्रति समर्पण की राजनीति थी, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।
राजनीतिक सफर एक नजर में
- डीएवी पीजी कॉलेज देहरादून के छात्रसंघ अध्यक्ष से राजनीति की शुरुआत
- युवा कांग्रेस के माध्यम से कांग्रेस संगठन में सक्रिय भूमिका
- 1985 में पहली बार विधायक निर्वाचित
- कुल तीन बार विधायक बने
- उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे
- परिवहन, श्रम एवं तकनीकी शिक्षा विभाग का दायित्व संभाला
- इंटक के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में लंबे समय तक कार्य किया
- उत्तराखंड राज्य आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे
- श्रमिकों, कर्मचारियों और गरीब तबके की आवाज़ बनकर जीवनभर संघर्ष किया
- हीरा सिंह बिष्ट का निधन केवल कांग्रेस पार्टी की नहीं, बल्कि उत्तराखंड की जनसंघर्ष की राजनीति के एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत माना जा रहा है। उनके सार्वजनिक जीवन की सादगी, जनसेवा के प्रति समर्पण और श्रमिकों के अधिकारों के लिए किया गया संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा।
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