- जनसंवाद यात्रा को लेकर प्रभारी ने जताई थी आपत्ति
- मुलाकात के बाद हरदा ने कहा-पार्टी मेरी सेवाओं का उपयोग करे
- 2027 में परिवर्तन हमारा लक्ष्य, जनता के सहयोग पर जताया आभार
देहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठनात्मक गतिविधियों और नेताओं के बीच समन्वय को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने शुक्रवार को कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव एवं उत्तराखंड प्रभारी कुमारी सैलजा से मुलाकात की। मुलाकात के बाद हरीश रावत ने कहा कि सभी का एक ही उद्देश्य है कि पार्टी मजबूत हो और 2027 में राज्य में परिवर्तन लाया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश और प्रदेशवासियों के सामने आने वाली चुनौतियों के समाधान के लिए वह लगातार आवाज उठाते रहेंगे।
हरीश रावत का यह बयान ऐसे समय आया है, जब उनकी ’धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ को लेकर प्रदेश कांग्रेस में विवाद सामने आया था। कुमारी सैलजा ने यात्रा के संबंध में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल और पार्टी प्रभारी से चर्चा किए बिना कार्यक्रम आयोजित करने पर आपत्ति जताई थी।
कुमारी सैलजा से मुलाकात के बाद हरीश रावत ने कहा कि कई मुद्दों पर बातचीत हुई है और सभी का लक्ष्य पार्टी को मजबूत करना है। उन्होंने जनता से मिले व्यापक सहयोग, समर्थन और भागीदारी के लिए आभार जताया। पूर्व मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि वह लोकतंत्र बचाने की बड़ी लड़ाई लड़ रहे हैं।
यात्रा को लेकर आमने-सामने आए थे पार्टी नेतृत्व और हरीश रावत
हरीश रावत की जनसंवाद यात्रा को लेकर कांग्रेस के भीतर उस समय असहज स्थिति पैदा हुई, जब पार्टी नेतृत्व की ओर से यात्रा आगे नहीं बढ़ाने का संदेश दिया गया। कुमारी सैलजा ने एक अक्टूबर को पत्र लिखकर रावत से यात्रा और अन्य राजनीतिक कार्यक्रमों को आगे नहीं बढ़ाने का अनुरोध किया था। इसके बावजूद रावत ने अपनी यात्रा जारी रखने का रुख अपनाया और इसे जनता से संवाद तथा शुभचिंतकों के प्रति आभार व्यक्त करने का कार्यक्रम बताया।
सुलह की दिशा में संकेत या संगठनात्मक समन्वय की पहल?
जनसंवाद यात्रा को लेकर सामने आए मतभेदों के बाद कुमारी सैलजा से हुई मुलाकात और हरीश रावत के बयान को कांग्रेस के भीतर समन्वय के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा सकता है। हालांकि, रावत के संदेश में यात्रा विवाद के समाधान या भविष्य में उनके कार्यक्रमों को लेकर किसी स्पष्ट समझौते का उल्लेख नहीं है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में हरीश रावत की भूमिका किस तरह तय होती है और प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व वरिष्ठ नेताओं के बीच तालमेल बनाकर संगठनात्मक गतिविधियों को किस दिशा में आगे बढ़ाता है।
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