108 भाषाओं में गूंजा शांति और एकता का पैगाम

108 भाषाओं में गूंजा शांति और एकता का पैगाम

देहरादून। ‘सुलेख कला के दर्पण में पवित्र कुरान’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय प्रदर्शनी का रविवार को समापन हो गया। तस्मिया पवित्र कुरान संग्रहालय की और से आयोजित इस प्रदर्शनी ने देशभर से आए दर्शकों के मन पर गहरी छाप छोड़ी। कार्यक्रम में उत्कृष्ट सुलेख कला और 108 भाषाओं में अनुवादों के माध्यम से कुरान के शांति, एकता और मानवता के संदेश को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।

संग्रहालय के अध्यक्ष डॉ. एस. फारूक ने अतिथियों और आगंतुकों का स्वागत करते हुए कहा कि “कुरान का संदेश गहन शांति और भाईचारे का है। हमारे युवाओं के लिए इस शाश्वत ज्ञान को समझना और जीवन में उतारना अत्यंत आवश्यक है।” कार्यक्रम में शरीन आरशी ने प्रदर्शनी की प्रस्तुति की सराहना करते हुए कहा कि “कुरान का संदेश पूरी मानवता के लिए है और यह प्रदर्शनी उसी सार्वभौमिक भावना को दर्शाती है।”

message of peace resonated in 108 languages

डॉ. प्रतिमा मेनन अपने छात्रों के साथ प्रदर्शनी में शामिल हुईं। उन्होंने इसे प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन युवाओं को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। प्रदर्शनी में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में पुरुष, महिलाएं और बच्चे पहुंचे।

आगंतुकों को पवित्र कुरान की आयतों को 108 भाषाओं—फ्रेंच, चीनी, गढ़वाली, कुमाऊँनी और गुरमुखी सहित—में देखने और समझने का अवसर मिला। सुलेख कला में उत्कीर्ण दुर्लभ और बहुमूल्य कृतियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। समापन समारोह में सैयद फर्रुख अहमद ने मधुर स्वर में हम्द पेश कर वातावरण को भाव-विभोर कर दिया।

कार्यक्रम में फिल्म अभिनेता सतीश शर्मा, आर.एल.ई.के. की निदेशक प्रतिमा मेनन, डॉ. आर. के. बख्शी, डॉ. आई. पी. पांडे, एम. एम. खान, हर्ष निधि शर्मा, सैयद हारून अहमद, डॉ. फैसल अहमद, सैयद इमरान अहमद, सैयद मोहम्मद यासर, जहांगीर अहमद, मुफ्ती सलीम अहमद, मुफ्ती वसीउल्लाह और मुफ्ती ज़िया आदि उपस्थित रहे।